Wednesday, December 2, 2020

नकारात्मक सोच Negative Thoughts

 


शीत ऋतु की संध्या में यह जलती हुई लकड़ियों पर हाथ तापना किसे अच्छा नहीं लगता! कितने पहर बीत जाते हैं इन लकड़ियों को चटकाते, घुमाते, पता ही नहीं चलता। यह लकड़ियां पहले जलती हैं और फिर हमें ताप देती हैं और अन्त में राख बन जाती हैं। जरा सोचिए, यह अग्नि उत्पन्न कहां सी होती है। उत्तर है इन लकड़ियों में से। फिर बताइये, यह राख कहां से उत्पन्न होती है। उत्तर वही है, उन्हीं लकड़ियों में से। अब अग्नि और राख - दोनों लकड़ियों से उत्पन्न होती है। जरा सोचिए कि अग्नि, जो इन लकड़ियों को जलाती है और राख वोह जो इस अग्नि को बुझा देती है तो कुछ समझिए कि आपकी ऊर्जा आपके शरीर से उत्पन्न होती है और नकारात्मकता रुपी राख भी आपके भीतर से ही उत्पन्न होती है। आप सोचिए, क्या आप अपने भीतर के प्रकाश को जगा कर इस संसार को प्रकाशित करना चाहते हैं या अपने भीतर की नकारत्मकता को जगा कर इस संसार में अन्धकार फैलाना चाहते हैं?

हर सपने को अपनी सांसों में रखो, हर मंजिल को अपनी बांहों में रखो

हर चीज़ आपकी ही है, बस अपने लक्ष्य को अपनी निगाहों में ही रखो।


Tuesday, December 1, 2020

मन पर नियंत्रण Control over Mind

 मन पर नियंत्रण

आपने यह अक्सर सुना होगा कि आज मेरा मन नहीं है। ऐसे वाक्य दिन में हम जाने कितनी बार बोलते होंगे और इनके चलते न जाने दिन भर कितना समय खराब कर देते हैं। भले ही मन हमारा होता है लेकिन वोह कभी भी हमारा हितैषी नहीं होता। हमारे साथ आँख मिचौली खेलता रहता है। आप कोई काम करना चाह रहे हैं और वोह काम आपके लिए जरुरी भी बहुत है, आप पायेंगे कि आपका मन कभी भी आपके साथ खड़ा नहीं होता। हां, गलत कार्यों, मनोरंजन और फालतू के कार्यों के लिए आपके साथ भी क्या, आप से भी दो कदम आगे चलेगा।

जहां पर बात किसी उद्देश्य की आयेगी, शारीरिक श्रम की आयेगी, मानसिक परेशानी आयेगी, आपका मन उसके विरोध में खड़ा हो जायेगा। क्या यह सत्य नहीं है? हमारा मन ऐसे-ऐसे तर्क ढूंढ लेगा कि हम यहां नहीं मिलेंगे, सचमुच वोह कार्य अभी नहीं किया जाना चाहिए। दुर्भाग्यवश हम यह निर्णय यह जानते हुए भी ले लेते हैं कि इस काम को आगे चल कर करना ही पड़ेगा। इसी के चलते हम जाने कितने ही अवसर गंवा देते हैं!

क्या हम अपने मन पर नियंत्रण नहीं रख सकते? क्या इस तरह की मनमानी करता रहेगा? जब भी आपका मन किसी कार्य को कल के लिए टाल दे, उसी समय अपने आदेश के विरोध में खड़े हो जायें। मन से आदेश लेने की बजाय मन को यह आदेश दें कि यह काम अभी होना है। मन बहुत शक्तिशाली है उन लोगों के लिए जो बहुत कमजोर हैं। लेकिन मन कमजोर है, उन लोगों के लिए जो बहुत शक्तिशाली है। इस पर विचार मंथन जरुर करें।